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उइगर मुस्लिम चीन समुदाय के मानवाधिकार हनन पर अमेरिका ने लिया सख्त फैसला

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लंबे समय से चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिम चीन समुदाय मानवाधिकार हनन का कहर झेल रहा है। इस पर चिंता जाहिर करते हुए अमेरिकी सरकार ने चीन के 28 संगठनों को काली सूची में डाल दिया है। इन संगठनों में चीन की सरकारी एजेंसियां और सर्विलांस उपकरण बनाने में माहिर कंपनियां भी शामिल हैं। काली सूची में डाले जाने से यह संगठन बिना अमेरिकी सरकार की अनुमति के उसके उपकरण नहीं खरीद सकेंगे।

गौरतलब है कि, चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने 10 लाख से अधिक उइगर मुसलमानों को लंबे समय से कैद कर रखा है। ट्रेनिंग सेंटर के नाम पर उनकी धार्मिक मान्यताओं और भावनाओं को कुचला जा रहा है। चीन के अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिम चीन समुदाय की शिनजियांग प्रांत में सबसे अधिक संख्या है। दशकों से शिनजियांग प्रांत को चीन से अलग करने की मांग को लेकर अलगाववादी संघर्ष चलता चल रहा है।

चीनी सरकार का कहना है कि अलगाववादियों की चरमपंथी सोच को खत्म करने के लिए ट्रेनिंग सेंटर चलाया जा रहा है। चीनी अधिकारियों की नजर में सभी अल्पसंख्यक संभावित अपराधी हैं।

कश्मीर में मानवाधिकार हनन के मुद्दे को यूएन तक खींचने वाला पाकिस्तान भी इस उइगर मुसलमानों पर चुप्पी साधे है। वहीं, दूसरे मुस्लिम देशों से लेकर देशव्यापी मीडिया भी इसे तवज्जो नहीं दे रही है। इस पर अमेरिका ने पहल करते हुए चीन के खिलाफ सख्त फैसला लिया है।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग के बयान के अनुसार काली सूची में डाले गये चीन के संगठन मानवाधिकार के हनन और दुरूपयोग के मामलों में फंसे हुए हैं। वहीं, मानवाधिकार समूहों का कहना है कि चीन उइगुर मुसलमानों के साथ बहुत बुरा व्यवहार कर रहा है। उन्हें बिना वजह कैदी बनाकर रखा गया है और प्रताड़ित किया जा रहा है।

चीन अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन करने में लगा है। चीनी सरकार का कहना है कि शिनजियांग प्रांत में आतंकवादियों से लड़ने के लिए वोकेशन प्रशिक्षण केन्द्र चलाया जा रहा है। वहां प्रताड़ना जैसी कोई चीज नहीं है। जबकि, रिपोर्ट के मुताबिक वहां के हालात काफी गंभीर हैं। अल्पसंख्यक चीनी खौफ की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

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शिंजियांग प्रांत विवाद और उइगर मुस्लिम चीन समुदाय

शिंजियांग गणराज्य चीन का स्वायत्तशासी प्रांत है. यहां अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की संख्या सबसे अधिक है. यह एक रेगिस्तानी और सूखा इलाका है. इसकी सरहदें दक्षिण में तिब्बत और भारत, दक्षिण-पूर्व में चिंग हई और गांसू, पूर्व में मंगोलिया, उत्तर में रूस और पश्चिम में काज़कस्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से मिलती हैं. यहां तुर्की नस्ल के लोग उइग़ुर कहलाते हैं जो करीब सभी मुसलमान हैं. यह इलाका चीनी तुर्किस्तान या मशरिकी तुर्किस्तान भी कहलाता है. यहां चीन से अलग होने के लिए सदियों से अलगाववादी संघर्ष चल रहा है.

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उइगर मुस्लिम चीन समुदाय का एक अलगाववादी समुह सदियों से शिंजियांग प्रांत को चीन से अलग करने के लिए संघर्ष कर रहा है. समुह का मानना है कि यह प्रांत चीन का अंश नहीं है. बल्कि 1949 में चीन ने आक्रमण कर इस हिस्से पर कब्जाया था और अभी तक अनाधिकृत रूप से चीन का कब्जा है. पूर्वी तुर्किस्तान स्वाधीनता आंदोलन नाम का दल कुछ तुर्की मुसलमानों द्वारा चलाया जा रहा है. अक्सर अलगाववादी समुह और शिंजियांग की कम्युनिष्ट पार्टी सरकार के बीच हिंसक झड़प भी होती रहती है.

हालही में साल 2013-14 में शिंजियांग के काशगार, कुनमिंग जैसे शहरों में अलगाववादी और पुलिस के बीच खूनी झड़प से लेकर दंगे तक हुए. जिनमें कई दर्जन मौतें हुई थीं. इनमें करीब 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की भी खबर है. चीनी सरकार ने इन हिंसक झड़प और दंगों के पीछे अलगावावादी समुह को जिम्मेदार ठहराया था.

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