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आपात स्थिति में सरकार हमेशा आंकड़ा देखती है, इंसान नहीं

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घनश्याम चौरसिया, Ghanshyam Chaurasiya, Coronavirus, Corona Virus

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आपात स्थिति में सरकार (भारतीय) हमेशा आंकड़ा देखती है, इंसान नहीं। मान लिजिये कि लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान भुखमरी से हर हफ्ते 50 लोग मरते हैं, लेकिन अगर ये रोग फैल गया तो हफ्ते भर में 5 हज़ार से ज्यादा लोग मरेंगे। सरकार के सामने आँकड़े 5 हज़ार और 50 का होता है, तो ज्यादा किस स्थित में मौत होती है? और वो 50 मरने वाला कोई अडानी, अंबानी, टाटा, बिरला, मंत्री, अफसर के घर का नहीं होता है, कोई मजलूम गरीब भिखारी होता है।

इनके मरने के बाद कौन पूछेगा कि कौन है ये? कब मरा, कैसे मरा? कितने दिन खाना ना मिलने पर मरा? लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान एक समय तक गरीबों को पड़ोस के चच्चा खिला देंगे, आंटी ब्रेड दे देंगी, दादा दाल रोटी भेज देंगे तो गरीब कैसे भी जी लेंगे। उसके बावजूद नहीं जिएंगे तो मर जायेंगे लेकिन हजारो जान तो नहीं जायेगी, जो महामारी बनकर घूम रही है। इसलिये सरकार की मज़बूरी भी रहती है, इंसान से ज्यादा आंकड़ो पर ध्यान देना।

उदहारण के तौर पर अंत में एक सवाल, क्या कभी आपने किसी भी इंसान, सरकार या मीडिया से सुना है कि वो लड़का जो अपने घर का अकेला था कमाने वाला था, महान था/बुरा था, जिसने बहुत अच्छा/बुरा काम किया था, अमीर था/गरीब था वो कोरोना संक्रमण से मर गया? बिल्कुल नहीं सुना होगा।

हजारो मौतो की गिनती में वो सिर्फ एक था जो मर गया। हां, लेकिन ऐसा जरुर सुना होगा कि “इटली में 24 घंटे में 645 मरे, अमेरिका में 45 और चीन में 200 मरे और कोरोना से भारत में अभी तक बस 3 मरे। यही आँकड़े हैं जिसको सुनकर आप भी खुश होते हैं कि हमारे यहां मौत के आंकड़े कम है।

कुल मिलाके, लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान सरकार अनाज, सब्ज़ी, तेल, मसाले की बिना किसी समस्या के आपूर्ति कर भी नहीं सकती। जितना ढील मिलना होगा वो आपको मिलेगा और उसी ढील में आपको सामन्जस्य मिलाके जिंदा रहना है। जितना सरकार को करना है वो करेगी और कर रही है। आपको घर से बाहर नहीं निकलना हैं। क्योंकि बहुत बुरा होता है इंसान को आँकड़े में तब्दील होते देखना। अगर नहीं चेते तो हजारो मौत के बीच एक गिनती आपकी होगी और आपकी लापरवाही से दो चार गिनती आपके परिवार की भी हो जायेगी बस।

इसलिये सरकार के इस कदम का स्वागत करिये। गरीबों को खुद ही हर संभव जिंदा रहने में मदद करिये। सरकार थोड़े कहेगी कि जो मर रहा है वो मर जाए हम आंकड़ो पर ध्यान देंगे, ऐसा बोल दे तो आप दंगा कर देंगे इसलिये सरकार कहती है कि हम किसी भी चीज़ की कमी नहीं होने देंगे, आल इज वेल। लेकिन वही सरकार लाकर देती भी नहीं है। लाकर देगी भी कहां से? ना लेबर है ना किसान, सब घर में बैठे हैं, फैक्ट्री बन्द है। सीमा सील है, ना लाने वाला है, ना ले जाने वाला।

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