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मध्य प्रदेश: छात्र संगठनों की चेतावनी, रिक्त पड़े बैकलॉग पद की भर्ती को जल्द भरे सरकार

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आदिवासी छात्र संगठन (ACS) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति युवा संघ (NAJJYS) ने मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Govt.) को भारी आंदोलन की चेतावनी दी है। छात्र संगठनों की मांग है कि सरकार एक साथ 52 जिलों में बैकलॉग के रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करे। साथ ही विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं का निराकरण और शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने की मांग रखी। इस सन्दर्भ में रैली के माध्यम से महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री कमल नाथ के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

छात्र संगठनों के पदाधिकारियों ने द गांधीगिरी को बताया कि वर्ष 2003 के बाद से आज तक बैकलॉग पदों की भर्ती नहीं हो सकी है। मध्यप्रदेश में एसटी-एससी वर्ग के 108000 (एक लाख आठ हजार) बैकलॉग के पद रिक्त हैं।

इन रिक्त पदों की भर्ती के लिए पिछली सरकार ने अपने 15 वर्ष के कार्यकाल के दौरान एक भी भर्ती नहीं निकाली। मध्यप्रदेश में शिक्षा का स्तर भी लगातार नीचे गिरते जा रहा है।

हालही में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा की गुणवत्ता में मध्य प्रदेश 15 वें नंबर पर पिछड़ा हुआ है। सरकारी शिक्षा व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है।

सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बचाने और शिक्षा के स्तर में गुणवत्ता लाने के लिए शिक्षा के निजीकरण पर प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही एक समान शिक्षा प्रणाली प्रदेश सहित पूरे देश में लागू की जाए।

अमीर-गरीब तथा नेता-अफसर के बच्चे एक ही छत के नीचे एक साथ बैठकर एक जैसी शिक्षा ग्रहण करें। शिक्षा सभी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए केजी से पीजी तक निशुल्क होनी चाहिए।

छात्र संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार को 20 दिनों का समय दिया गया है। 21वें दिन अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा।

मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव-2018 के अपने वचन पत्र की कंडिका क्रमांक 47.38 में यह वादा किया था कि वर्ष 2003 को आधार मानते हुए बैकलाग के सभी रिक्त पद भरेंगे।

साथ ही एसटी-एससी वर्ग के युवाओं को निर्धारित योग्यता और आयु सीमा में छूट भी देंगे। बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता भी देंगे।

सत्ता में आये सरकार को 9 माह बीत चुके हैं। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से बैकलॉग पदों की भर्ती को लेकर कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है। बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त संगठन की अन्य प्रमुख मांग इस प्रकार है-

1. शासकीय अध्यापकों एवं प्राध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त रखा जाए।

2. प्रत्येक विद्यालय महाविद्यालय में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के अनुपात में विषय वार नियमित अध्यापकों एवं प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाए।

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3. कई सालों पुराने छात्रावास भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, उसका तत्काल जीर्णोद्धार किया जाए एवं प्रदेश के कई जिलों में छात्रावास का संचालन किराए के भवन में किया जा रहा है वहां पर तत्काल नए भवन बनवाए जाए।

4. आजादी के समय से संचालित छात्रावासों में सीटों की संख्या उतनी ही है जबकि आज के समय में जनसंख्या कई गुना बढ़ गई है, जनसंख्या के अनुपात में आश्रमों, प्री मैट्रिक व महाविद्यालयिन छात्रावासों की निर्धारित सीट संख्या में वृद्धि की जाए।

5. जनसंख्या को दृष्टिगत रखते हुए प्रत्येक जिला स्तर पर एसटी / एससी वर्ग के बालक बालिकाओं के लिए क्रमशः 1000 – 1000 सीटर एवं संभाग स्तर पर 2500-2500 सीटर का नवीन महाविद्यालयीन छात्रावास खोला जाए।

6. एसटी/एससी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी हेतु प्रत्येक जिला स्तर पर बालक बालिकाओं के लिए क्रमशः 200 -200 सीट संख्या का परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र (छात्रावास) खोला जाए एवं इन वर्ग के बेरोजगार युवाओं को प्रतियोगीता परीक्षा शुल्क से मुक्त रखा जाए।

7. प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय, छात्रावास एवं आश्रम के भवन को वाईफाई से कनेक्ट कर कंप्यूटर लैब एवं ई- लाइब्रेरी की व्यवस्था की जाए।

छात्रवृत्ति और आवास सहायता राशि का भुगतान समय पर नहीं होने से कई विद्यार्थियों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए छात्रवृत्ति का भुगतान शिक्षण सत्र के प्रारंभ में और आवास सहायता की राशि का भुगतान प्रतिमाह किया जाए।

ACS और NAJJYS के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश बंडोड़ , प्रदेश संगठन मुक़ामसिंह अलावा और नाजी के प्रदेश अध्यक्ष रामसिंह रसोनिया ने बताया कि उक्त समस्याओं और मांगों को लेकर शासन-प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपा गया है।

प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से मुलाकात कर समस्याओं के बारे में भी अवगत कराया गया। इसके बावजूद आज तक विद्यार्थियों की समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ है।

हमारी समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सरकार ने 20 दिवस के भीतर इसका निराकरण नही किया तो 21वें दिन से आदिवासी छात्र संगठन(ACS), मध्यप्रदेश एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति युवा संघ (नाजी), प्रदेश भर में चरणबद्ध रूप से बैकलॉग भर्ती एवं शिक्षा सुधार आंदोलन किया जाएगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की रहेगी।

अब देखना होगा कि मध्यप्रदेश कमलनाथ सरकार छात्रों की मांगें पूरी करती है या नही अभी नवम्बर दिसम्बर में छात्र संघ चुनाव भी मध्यप्रदेश में संभावित है इसको देखते हुए सरकार अपने वचन पत्र के आधार पर बैकलॉग भर्ती करती है या नही।

 

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