गुरू पूर्णिमा के दिन अनुपम खेर ने इन दो मुस्लिम गुरूओं को किया नतमस्तक प्रणाम

anupam kher on guru purnima, गुरु पूर्णिमा, बलवंत गार्गी, अमाल अल्लाना, इब्राहीम अलकाज़ी, अनुपम खेर, रंगमंच, संगीत नाटक अकादमी

आज गुरु पूर्णिमा यानी गुरू की पूजा का दिन है. आषाण मास की पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा कहते हैं. इस दिन हिन्दू धर्म में शिष्यों को अपने गुरू की पूजा करने का विधान है. इसी प्रथा को कायम रखते हुए बाॅलीवुड के मशहूर अभिनेता, निर्माता और निर्देशक अनुपम खेर ने भी अपने गुरूओं को नतमस्तक प्रणाम किया. उनकी सूची में दो मुस्लिम गुरूओं के नाम भी शामिल थें.

 

अनुपम खेर ने अपने ट्वीटर हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरू बलवंत गार्गी, अमाल अल्लाना और इब्राहम अलकाज़ी को याद करते हुए उन्हें नतमस्तक प्रणाम किया. उन्होंने कहा कि, ‘इंसान हमेशा जिंदगी के रास्ते पर भटकता रहता है और कोई न कोई आपका हाथ पकड़ कर फिर से सही रास्ते पर लाने की कोशिश करता रहता है.’ आगे कहा कि, ‘गुरु पूर्णिमा के दिन ऐसे तीन हाथ मेरे ऊपर जिन्हें प्रणाम करना चाहता हूं, वो हैं मेरे ड्रामा टीचर स्व0 बलवंत गार्गी, अमाल अल्लाना और इब्राहीम अलकाज़ी.’

जानिये अनुपम खेर के इन तीनों गुरूओं के बारे में

बता दें कि लेखक और नाट्कीय कलाकार प्रो. बलवंत गार्गी सन् 1916 को पंजाब के भटिंडा में जन्में थें. भारतीय रंगमंच और पंजाबी भाषित नाट्कीय कलाओं में उन्हें महारत हासिल थी. उन्हें राष्ट्रीय अकाडमी अवाॅर्ड, संगीत नाटक अकादमी अवाॅर्ड और पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. 86 साल की उम्र में मुंबई में उनका देहांत हो गया था.

balwant gargi, गुरु पूर्णिमा, बलवंत गार्गी, अमाल अल्लाना, इब्राहीम अलकाज़ी, अनुपम खेर, रंगमंच, संगीत नाटक अकादमी

the gandhigiri app download, thegandhigiri  

वहीं, सन् 1925 में महाराष्ट्र के पुने शहर में इब्राहीम अलकाज़ी एक सऊदी अरब के अमीर उद्योगपति के घर में जन्में थें. उनकी माता कुवैती थी. वह भारतीय थिएटर निर्देशक, दिल्ली के नैशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के निर्देशक थें. उन्हें सख्त अनुशासनवादी के रूप में भी जाना जाता है. उन्हें ‘तनवीर अवाॅर्ड’, ‘पद्मभूषण’, ‘पद्मश्री’, ‘पद्मविभूषण’, ‘संगीत नाटक अकादमी अवाॅर्ड’ और ‘संगीत नाटक अकादमी अवाॅर्ड फेलोशिप’ से सम्मानित किया गया.

emrahim alkazi, balwant gargi, गुरु पूर्णिमा, बलवंत गार्गी, अमाल अल्लाना, इब्राहीम अलकाज़ी, अनुपम खेर, रंगमंच, संगीत नाटक अकादमी

सन् 1947 में जन्मी अमाल अल्लाना इब्राहीम अलकाज़ी की पुत्री हैं. भारतीय थिएटर के आधुनिकीकरण में उनका बड़ा योगदान है. वह भारतीय थिएटर की निर्देशक, रंगमंच की सौंद्रीयकरण डिजाइनर, कास्ट्यूम डिजाइनर और वर्तमान में लगातार दूसरी बार नैशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा की चेयरपर्सन हैं. अल्लाना नैशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा की पहली निर्देशक भी रह चुकी हैं. उन्होंने हिंदी में 55 से अधिक नाटकों को निर्देशित किया है. उन्हें सन् 1998 में ‘संगीत नाटक अकादमी अवाॅर्ड’ से सम्मानिक किया गया है.

amal allana, emrahim alkazi, balwant gargi, गुरु पूर्णिमा, बलवंत गार्गी, अमाल अल्लाना, इब्राहीम अलकाज़ी, अनुपम खेर, रंगमंच, संगीत नाटक अकादमी

शास्त्रों में ‘गुरू’ का क्या अर्थ है?

शास्त्रों में ‘गु’ का अर्थ है अंधकार या अज्ञानता और ‘रू’ का अर्थ है अंधकार और अज्ञानता का निरोधक. इस प्रकार दोनों शब्द मिल कर जो ‘गुरू’ बनता है उसका मूल अर्थ होता है, अज्ञानता और अंधकार से बाहर निकालने वाला. साधारण भाषा में कहें तो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला वह व्यक्ति जो आपका मार्ग दर्शक बने.

अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करें

https://www.thegandhigiri.com/baba-ram-dev-land-acquisition-for-patanjali-soyabin-processing-unit-in-latur/

Asif Khan works as freelancer journalist from Lucknow district of Uttar Pradesh state in India.. He is native of Gorakhpur district. Asif Khan has worked with former Nav Bharat Times special correspondent Mr. Vijay Dixit, worked as video journalist in IBC24 news from Lucknow, worked with 4tv bureau chief Mr. Ghanshyam Chaurasiya, worked with special correspondent of Jan Sandesh Times Capt. Tapan Dixit. He has worked as special correspondent in The Dailygraph news. Contact with him via mail asifkhan2.127@gmail.com or call at +91-9389067047

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *