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भगोड़े विजय माल्या का बंगला खरीदने वाले सचिन जोशी ने किया माल्या से बड़ा फ्रॉड, इडी ने किया गिरफ्तार

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गोवा: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभिनेता और उद्योगपति सचिन जोशी (Sachin Joshi) को देर रात गिरफ्तार कर लिया। उन्हें शनिवार को हिरासत में लिया गया था और उनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई थी।

जोशी को 22 हजार करोड़ रुपए के एक घोटाले में अरेस्ट किया गया है, सोमवार को उन्हें मुंबई की एक अदालत में पेश किया गया।

इसी मामले में दो सप्ताह पहले मुंबई के ओमकार ग्रुप बिल्डर के चेयरमैन कमल गुप्ता और एमडी बाबूलाल वर्मा को अरेस्ट किया गया था। सचिन जोशी, एक्ट्रेस सनी लियोन के साथ साल 2013 में आई फिल्म ‘जैकपॉट’ को लेकर सुर्खियों में आये थे।

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आपत्तिजनक सीन की वजह से सेंसर बोर्ड ने फिल्म के एक गाने ‘एगजैक्टली’ पर पाबंदी लगाई थी। सचिन जोशी ने साल 2017 में विजय माल्या का गोवा में स्थित ‘किंगफिशर’ बंगला भी खरीदा था।

इससे पहले अंधेरी (पश्चिम मुंबई) के रहने वाले पराग सांघवी ने सचिन जोशी (Sachin Joshi) के खिलाफ 58 लाख की रॉयल्टी नहीं देने का केस दर्ज करवाया था।

इसके अलावा, उनकी कंपनी पर 30 पूर्व कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं करने का भी आरोप लगाया गया था। सचिन जोशी पर ड्रग्स मामले में अक्टूबर 2020 में मुकदमा भी चला था।

सचिन JMJ ग्रुप के मालिक जगदीश जोशी के बेटे हैं। सचिन जोशी JMJ ग्रुप के प्रमोटर भी हैं जो पान मसाला, परफ्यूम, द्रव्य पदार्थों और शराब का व्यापार करता है।

सचिन जोशी ने टॉलीवुड और बॉलीवुड में कई फिल्मों का निर्माण किया है। सचिन जोशी ने श्रीलंका क्रिकेट लीग में टीम खरीदी थी।

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उन्होंने अंजान, मुंबई मिरर, जैकपॉट, वीरप्पन, अमावस जैसी हिंदी फिल्मों में अभिनय किया है। इसके अलावा उन्होंने एक दर्जन दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया है। सचिन जोशी ने साल 2017 में किंग फिशर विला को खरीदा था।

ED ने जनवरी के अंत में मुंबई में प्रसिद्ध डेवलपर ओंकार ग्रुप के कार्यालयों पर छापा मारा था। ओमकार ग्रुप ने तमाम बैंकों से हजारों करोड़ रुपए का कर्ज लिया है।

इसमें 450 करोड़ रुपए का कर्ज यस बैंक का है। यह कर्ज मुंबई में स्लम एरिया को बिल्डिंग बनाने के लिए (स्लम रिहैबिलेशन) के लिए लिया गया था।

ED ने सोमवार को इस मामले में ओमकार ग्रुप के 10 परिसरों पर छापा मारा था। सूत्रों ने बताया कि ओमकार ग्रुप के ऑफिस से ढेर सारे कागज रिकवर किए गए हैं।

बाबू लाल वर्मा और कमल नाथ गुप्ता पर आरोप था कि दोनों जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे इसलिए उनको कस्टडी में लिया गया है।

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