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Apple Hospital: शव देने के बदले अस्पतालवालों ने मांगे 4.5 लाख, रेमडेसिविर की कालाबाजारी करते पहले भी हो चुका है सील

पूरे देश में कुकुरमुत्ते की तरह फैले कालाबाजारी और अवैध उगाही करने वाले फर्जी अस्पताल कोरोनाकाल को पूरी तरह अवसर में बदलते दिख रहे हैं, इसके बावजूद सीएमओ कार्यालय इनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के बजाये इन्हें घरजमाई की तरह पालपोस रहा है। ऐसा ही एक किस्सा इंदौर के एप्पल अस्पताल (Apple Hospital Indore) का है।

इंदौर के निजी अस्पताल में युवक की कोरोना से मौत के बाद परिवार वालों ने हंगामा कर दिया। हॉस्पिटल प्रबंधन 4.5 लाख रुपए जमा करने पर अड़ा था। परिवार वालों का आरोप है कि बाहर से 6 रेमडेसिविर इंजेक्शन भी वही लाए थे। परिजन ने अस्पताल प्रबंधन पर दवा और इंजेक्शन की कालाबाजारी का आरोप लगाया है। काफी विवाद के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव सौंपा। मामला एप्पल हॉस्पिटल का है।

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6 अप्रैल से नरेश सिंह निवासी चित्रकूट जो वर्तमान में संगम नगर में रह रहे थे। नरेश को संक्रमित होने के बाद एप्पल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई। परिजनों ने शव को लेने की बात की, तो अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के 4.5 लाख रुपए मांगे।

परिजन ने बताया, मरीज पॉजिटिव होने के बाद दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसके बाद उन्हें आईसीयू में रखा था, लेकिन सही से उपचार नहीं होने के चलते मौत हो गई। साथ ही, उन्होंने अस्पताल प्रबंधक पर दवाई और इंजेक्शन की कालाबाजारी का आरोप लगाया। कहा कि सभी दवाइयां बाहर से मंगाई जाती थी। नरेश की पत्नी का कहना है कि रेमडेसिविर डॉक्टर द्वारा लिखे गए थे।

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परिवार का कहना है कि, मुश्किल से उन्होंने इंजेक्शन का इंतजाम किया। उन्हें एक भी इंजेक्शन नहीं लगा। सभी इंजेक्शन बेच दिए गए। पति के इलाज के लिए कर्ज लिया है। नरेश को 25 अप्रैल से वेंटीलेटर पर रखा गया था। अस्पताल प्रबंधन ने ₹7 लाख रुपए बिल बना दिया। 3 लाख रुपए पहले जमा कर चुके थे। अब 4.5 लाख रुपए और मांग रहे हैँ।

विवाद की स्थिति देखकर हॉस्पिटल के ने शव को परिजनों को सौंपा। बता दें, एप्पल हॉस्पिटल (Apple Hospital Indore) में कुछ दिनों पूर्व प्रशासन द्वारा रेमडेसिविर की कालाबाजारी करते हुए सील करने की कार्रवाई की गई थी।

अगस्त 2020 में अस्पताल ने किया था कारनामा

कोरोना मरीज के इलाज के लिए छह लाख का बिल दिए जाने के मामले में भंवरकुआं स्थित एप्पल अस्पताल (Apple Hospital Indore) को नोटिस जारी किया गया था। साथ ही, तीन सरकारी डॉक्टर्स को भी नोटिस दिए गए थे। जो अनुमति नहीं होने के बाद भी वहां इलाज के लिए गए। 22 दिन तक कोरोना मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती रखा गया। छह लाख रुपये का बिल थमा दिया था। इतने भारी भरकम बिल के बावजूद एक लाख की दवाइयां अलग से मंगवाई थी। पीपीई किट, आइसोलेशन चार्ज और यूनिवर्सल प्रोटेक्शन के नाम पर प्रतिदिन 9,000 रुपये के हिसाब से राशि वसूल की गई थी।

16 अप्रैल को कलेक्टर ने भेजा था जेल

शिकायत के बाद 4 अप्रैल को इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने निजी अस्पतालों की बैठक बुलाई थी, जिसमें एप्पल अस्पताल के पीआरओ द्वारा गलत जानकारी दिए जाने के बाद उन्हें फटकार लगाते हुए भवर कुआं को सूचित करते हुए धारा में मामला दर्ज करने को कहा था।

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