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मोदी सरकार इन सरकारी विभागों के 80 फीसदी कर्मचारियों को कर सकती है बेरोजगार

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मोदी सरकार में बीएसएनएल और एमटीएनएल की आर्थिक समस्याओं पर एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार और टीवी एंकर रविश कुमार लिखते हैं कि, आज के समय को आर्थिक नीतियों और घटनाओं से भी समझने का प्रयास करना चाहिए। फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस एक महत्वपूर्ण अख़बार है। इसके संपादक सुनील जैन ने ट्विट किया है कि बीएसएनएल और एमटीएनएल (BSNL, MTNL) को पटरी पर नहीं लाया जा सकता है। इसकी संपत्ति की पहली बिक्री से जो पैसा आए वो करदाताओं की हो।

कभी बीएसएनएल (BSNL) के पास 37,200 करोड़ का कैश भंडार था। आज यह 8600 करोड़ के घाटे में है। इसी पर फाइनेंशियल एक्सप्रेस के संपादक सुनील जैन ने ट्विट किया है कि एक ही रास्ता है कि 80 फीसदी कर्मचारी हटा दिए जाएं। अगर ऐसा हुआ तो हज़ारों लोग बेरोजगार हो जायेंगे।

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सुनील जैन का विचार है कि बीएसएनएल और एमटीएनएल (BSNL, MTNL) के 80 प्रतिशत कमर्चारियों को तत्काल बर्ख़ास्त कर देना चाहिए। इस 80 फीसदी में कई हज़ार कर्मचारी आते हैं। चुनाव से पहले कर्मचारियों ने वेतन को लेकर खूब प्रदर्शन किया था। तब दबाव में सरकार ने वेतन का भुगतान कर दिया था और बदले में कर्मचारियों ने सरकार को चुनाव में समर्थन भी दिया।  अब उन्ही कर्मचारियों के बेरोजगार होने की नौबत आ गई है.

उम्मीद तो यही है कि सरकार इन्हें निराश नहीं करेगी लेकिन यह भी उम्मीद है कि सरकार जो भी क़दम उठाएगी उसका कर्मचारी भी समर्थन करेंगे। देशहित सर्वोपरि। आख़िर घाटे की यह कंपनी कब तक चलेगी? घाटे में कैसे आई इस सवाल का समय चला गया। ऐसे सवाल चुनावों में पूछे जाते हैं।

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नोट: उपरोक्त लेख एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार और टीवी एंकर रविश कुमार के फेसबुक वॉल से लिया गया है. जिसमें उन्होंने “महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड” (एमटीएनएल) और “भारत संचार निगम लिमिटेड” (बीएसएनएल) की वर्तमान आर्थिक समस्याओं की स्थिति पर गहराई से शोध किया है. लेख के मुताबिक सरकार एमटीएनएल और बीएसएनएल की संपत्ति को बेच कर घाटा पूरा कर सकती है (जो कि फिलहाल मुमकिन नहीं) या दोनों विभागों के भारी संख्या में कर्मचारियों की छटनी कर सकती है. इस लेख पर द गांधीगिरी की ओर से कोई निजी राय व्यक्त नहीं किया गया है. पाठक इससे भिन्न राय भी रख सकते हैं.

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