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20 लाख करोड़ राहत पैकेज के बहाने ‘मित्रों’ को कितना फायदा पहुंचा सकती है सरकार?

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नई दिल्ली: भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहत पैकेज से जुड़े चौथे प्रेस कांफ्रेंस में अगली जानकारी दी है। उन्होनें बताया कि बिजली कंपनियों से लेकर कोल इंडिया की खदानें प्राइवेट हाथों में दी जाएंगी।

6 एयरपोर्टों की नीलामी

भारत सरकार अंबानी, अडानी, टाटा पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील और वेदांता जैसे उद्योपतियों को ज़बरदस्त फायदा पहुंचाने की तैयारी में है. वैसे तो बीते 6 सालों के दौरान मोदी सरकार में निजीकरण होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन कोरोना संकट में गरीब जनता को फायदा पहुंचाने के नाम पर ऐसे फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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वित्त मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि 6 और एयरपोर्टों की नीलामी होगी. इससे पहले भी 6 एयरपोर्टों की नीलामी हो चुकी है, मतलब कुल मिलाकर 12 हो जाएंगे. ध्यान देने वाली बात है कि उन्होनें ये भी कहा है कि इनमें से कुछ परियोजनाएं लंबे वक़्त के लिए हैं और इससे कोरोना संकट में मदद मिलने की संभावना नहीं है. फिर राहत पैकेज में ही इस नीलामी की घोषणा करने की क्या ज़रूरत थी?

कोल कंपनियों का निजीकरण

खनन (माइनिंग) को बढ़ाने के लिए सरकार कोल इंडिया लिमिटेड को बेहतर नहीं बना रही बल्कि उसी का निजीकरण कर रही है. आपको बता दें कि 50 ऐसे नए ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे. कोल खदानों की नीलामी को क्लब करके सरकार 500 माइनिंग ब्लॉक की नीलामी करेगी जिससे वेदांता एल्युमीनियम जैसी कंपनियों को फायदा होगा. देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार हर तरिके से निजीकरण का सहारा ले रही है.

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कोल खदानों और एयरपोर्टों की नीलामी के अतिरिक्त सरकार केंद्र शासित राज्यों में बिजली कंपनियों का निजीकरण भी करेगी. इस निजीकरण के चलते अडानी और टाटा पावर को बड़ा फायदा पहुँच सकता है. सरकार ने रक्षा उत्पादन में आने वाले FDI की लिमिट 49 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत कर दी है.

जानकारों का मानना है किअर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सरकारी कंपनियों का निजीकरण करके उद्योपतियों को फायदा पहुंचाने का काम किया जा रहा है. दूसरी तरफ श्रम कानूनों को एक तरह से खत्म करके मज़दूरों के शोषण पर मोहर भी लगाया जा रहा है. इसमें ओडिसा और राजस्थान जैसी राज्य सरकारें भी शामिल हैं.

(साभार, बोलता हिंदुस्तान)

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