Home Rashtriya Samachar लखनऊ: यूपीपीसीएल में पीएफ घोटाले को लेकर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग

लखनऊ: यूपीपीसीएल में पीएफ घोटाले को लेकर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग

61
लखनऊ यूपीपीसीएल में पीएफ घोटाले को लेकर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग, arrest Demand for accused of UPPCL PF scam Lucknow

thegandhigiri-news-app-may-2020

लखनऊ: आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश ने यूपीपीसीएल में हुए पीएफ घोटाले (UPPCL PF Scam) को लेकर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को बर्खास्त करने, घोटाले की हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच और सभी दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह (Abhijit Singh) ने कहा कि, “बिजली विभाग के इंजीनियर व कर्मचारियों का पैसा हर हाल में सुरक्षित होना चाहिए। इस महाघोटाले में दिखाई पड़ रहा है कि सरकार छोटी मछलियों को पकड़ कर कार्यवाही का दिखावा कर रही है, और बड़े घोटालेबाज इसके एक्शन के दायरे से बाहर है।”

उन्होंने प्रदेश की योगी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि, “चाहे कुछ भी हो जाए, किसी भी कर्मचारी की मेहनत की कमाई का एक भी पैसा डूबना नहीं चाहिए। सरकार इसकी गारंटी ले कि हर हालत में कर्मचारियों को उनका पैसा मिलना सुनिश्चित करेगी।”

इसके साथ ही यूपीपीसीएल में हुए पीएफ घोटाले (UPPCL PF Scam) को लेकर प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह ने ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के उस बयान को हास्यास्पद बताया, जिसमें उन्होंने कहा कि घोटाले की पटकथा सपा सरकार में लिखी गई।

आप प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि, “मंत्री जी की यह आदत है कि, वह खुद सरकार में होने के बावजूद सभी गलतियों का दोष पिछली सरकारों पर डाल देते हैं। हाल में ही उन्होंने प्रदेश की जनता को बिजली बिल में बढ़ोतरी करके एक बड़ा धोखा दिया है और इसके भी जिम्मेदार सपा और बसपा को बता दिया।”

बता दें कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के कर्मचारियों की भविष्य निधि के करीब 2600 करोड़ रुपये का अनियमित तरीके से निजी संस्था डीएचएफएल में निवेश किए जाने के मामले में दो अधिकारी सुधांशु द्विवेदी और पीके गुप्ता को बुधवार को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार कर सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट में पेश किया। जहां से कोर्ट ने सुधांशु और पीके गुप्ता को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

ईओडब्ल्यू ने दोनों की 7 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी थी, लेकिन सिविल जज जूनियर डिविजन ने 3 दिन की रिमांड मंजूर की।

प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की है। वहीं दूसरी तरफ इस महाघोटाले में लखनऊ पुलिस की भी बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।

दरअसल, पुलिस को सितंबर महीने में ही पूरे घोटाले की भनक लग गई थी। यूपीपीसीएल में हुए पीएफ घोटाले (UPPCL PF Scam) में गिरफ्तार हुए सचिव पीके गुप्ता से 6 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी।

पीके गुप्ता की पत्नी ने 5 सितंबर को हजरतगंज कोतवाली में रंगदारी मांगे जाने का मुकदमा दर्ज कराया था। हजरतगंज पुलिस ने बड़ा घोटाला देख 1 महीने बाद जांच ट्रांसफर कर दी।

यह भी पढ़ें: SC ने केंद्र और 9 राज्य सरकारों से ICI & SIC में रिक्तियों को लेकर मांगी रिपोर्ट

the gandhigiri, whatsapp news broadcast