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आरक्षण मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बीजेपी और संघ की विचारधारा के अनुकूल है – कम्युनिस्ट पार्टी

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communist party reaction after supreme court verdict on reservation

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लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को निराशाजनक बताया है। माले नेता ने कहा कि इसके लिए भाजपा और उसकी सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने इस आदेश को सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया है। वहीं, दलित नेता और मोदी सरकार में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने सुप्रीम कोर्ट के एससी, एसटी एक्ट को लेकर आये निर्णय का स्वागत किया, लेकिन प्रमोशन में रिजर्वेशन के निर्णय पर असहमति जताई।

कम्युनिस्ट पार्टी नेता सुधाकर यादव ने कहा कि इस आदेश के व्यवहारिक क्रियान्वयन में नौकरियों में वंचित समूहों को आरक्षण मिलना बंद हो जाएगा। भाजपा और उसका पितृ संगठन आरएसएस यही चाहते भी हैं। कई मौकों पर आरएसएस प्रमुख इसका इजहार भी कर चुके हैं। माले नेता ने कहा कि आरक्षण को सरकारों के विवेक पर छोड़ना लोकतंत्र में आगे जाने के बजाए पीछे लौटने जैसा कदम है।

दलित नेता आठवले ने कहा कि शीघ्र ही दलित समाज के मंत्रिमंडल के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर संसद में प्रमोशन में रिजर्वेशन दिए जाने के पक्ष में बिल लाये जाने की मांग करेगा।

आठवले ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रमोशन में रिजर्वेशन के संदर्भ में आया फैसला अन्याय कारक है और संविधान की भावना के अनुरुप नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण पर शीघ्र ही रामविलास पासवान, अर्जुन मुंडा, अर्जुन मेघवाल सहित अन्य समाज से आने वाले संसद सदस्यों के साथ पीएम मोदी से मिलकर संसद में प्रमोशन में रिजर्वेशन के पक्ष में बिल लाये जाने के साथ ही संविधान की 9वीं सूची में शामिल किए जाने की मांग की जायेगी।

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