गुरूवार, मार्च 30, 2023
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Indian Airforce Day 2022: जोश, जज्बा और जुनून का दूसरा नाम है भारतीय वायुसेना

हर वर्ष की तरह इस बार भी जोश और जज्बे के साथ 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस (Indian Airforce Day 2022) मनाया जाएगा। भारतीय वायुसेना का दल-बल निरंतर ताकतवर हो रहा है। यह हमारे देश के लिए बड़े ही गौरव की बात है। आज भारतीय वायु सेना की ताकत स्वदेशी लड़ाकू विमान बन रहे हैं। खास बात यह है कि देश अपनी सेना की ताकत ‘आत्मनिर्भरता’ की राह पर चलकर बढ़ा रहा है। इस क्रम में हाल ही में वायु सेना को लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ सौंपा गया है।

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गौरतलब हो, देश हर साल भारतीय वायुसेना दिवस को एक वार्षिक उत्सव के रूप में सेलिब्रेट करता रहा है। हर बार की तरह इस बार भी इसी दिन भारतीय वायुसेना अपना वार्षिक उत्सव मनाने जा रही है। लेकिन इस बार का वायुसेना दिवस अनोखा और अलग साबित होने वाला है। दरअसल, इस बार के वायुसेना दिवस में भारतीय वायुसेना के दल में शामिल नए विमानों की ताकत दुनिया को देखने को मिलेगी और पहली बार वायुसेना गाजियाबाद से बाहर ‘वायुसेना दिवस’ मनाएगी। इसके लिए सभी तैयारियां लगभग पूरी की जा चुकी हैं।

कब मनाया जाता है वायुसेना दिवस (Indian Airforce Day 2022) ?

हर साल की तरह इस बार भी भारतीय वायुसेना 8 अक्टूबर को 90वां वायु सेना दिवस मनाने जा रही है। यह आयोजन चंडीगढ़ की सुखना झील पर होगा। यही कारण है कि इस वर्ष का यह उत्सव ऐतिहासिक रहने वाला है। पहली बार इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली-एनसीआर गाजियाबाद के हिंडन बेस के बाहर किया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत तीनों सेना प्रमुख और हजारों दर्शक इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

8 अक्टूबर को ही क्यों मनाते हैं वायुसेना दिवस ?

उल्लेखनीय है कि देश-दुनिया के इतिहास में 8 अक्टूबर की तारीख कई अहम वजहों से दर्ज है। भारतीय वायुसेना के लिए यह तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। भारत हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस मनाता है। दरअसल, इसी दिन भारत में वायुसेना आधिकारिक तौर पर सहायक के रूप में अस्तित्व में आई थी। अविभाजित भारत में 08 अक्टूबर 1932 को ही रॉयल इंडियन एयरफोर्स की स्थापना हुई थी। तब यह औपनिवेशिक शासन के अधीन थी। इसी तारीख को भारत में वायुसेना दिवस के तौर पर हर साल मनाया जाता है। यह सबसे बड़ा उत्सव होता है।

भारतीय वायुसेना के बारे में

भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित हिंडन वायुसेना स्टेशन एशिया में सबसे बड़ा है। भारतीय वायुसेना के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक यह अपने ध्येय वाक्य ‘नभ: स्पृशं दीप्तम्’ के मार्ग पर चल रही है। वायुसेना के इस ध्येय वाक्य को भगवत गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है। इसका मायने हैं ‘गर्व के साथ आकाश को छूना।’ नीला, आसमानी नीला और सफेद वायु सेना के फ्लैग के रंग हैं।

भारतीय वायुसेना का इतिहास

द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय वायुसेना के योगदान के लिए इसे ‘रायल’ प्रीफिक्स से नवाजा गया था। 1950 में भारत के गणतंत्र बनने पर प्रीफिक्स को हटा दिया गया। भारतीय वायुसेना को आधिकारिक तौर पर यूनाइटेड किंगडम की रॉयल एयरफोर्स में एक सहायक बल के रूप में स्थापित किया गया था। 1947 में स्वतंत्रता के बाद से वायुसेना दिवस को नई दिल्ली के पालम में कार्यक्रमों, परेडों और एक फ्लाईपास्ट से चिह्नित किया गया है। पिछले करीब डेढ़ दशक से देश की राजधानी में ट्रैफिक की बढ़ती समस्या के चलते इस इवेंट्स को हिंडन एयर बेस में शिफ्ट कर दिया गया था।

कब भरी थी पहली उड़ान?

पहली बार इसने 01 अप्रैल 1933 को उड़ान भरी थी। इसके पहले दस्ते में 6 आरएएफ ट्रेंड ऑफिसर और 19 एयर सोल्जर शामिल थे। पहला ऑपरेशन वजीरिस्तान में कबाइलियों के खिलाफ था। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इसका विस्तार किया गया। भारतीय वायुसेना की जिम्मेदारी भारत को सभी संभावित खतरों से बचाना है और साथ ही आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्यों में मदद करना है।

आई.ए.एफ. का योगदान

वायुसेना कई युद्धों में शामिल रही है। इसमें है दूसरा विश्व युद्ध, भारत-चीन युद्ध, ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन विजय, कारगिल युद्ध, भारत-पाकिस्तान युद्ध, कांगो संकट। आज वायुसेना पांच ऑपरेशनल और दो फंक्शनल कमांड्स में विभाजित है। हर कमांड का नेतृत्व एयर मार्शल रैंक के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ करते हैं।

ऑपरेशनल कमांड का उद्देश्य जिम्मेदारी के क्षेत्र में एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करते हुए मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम देना है। फंक्शनल कमांड की जिम्मेदारी युद्ध के लिए तैयार रहने की है। बताना चाहेंगे कि वायुसेना के बेड़े में इस समय कई दमदार लड़ाकू विमानों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। सेना में शामिल हुए इन दमदार विमानों का रोमांचक प्रदर्शन जल्द ही लोगों को देखने को मिलेगा।


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