मुजफ्फरनगर हिंसा के गवाह को फर्जी मुठभेड़ में मारना चाहती है पुलिस – रिहाई मंच

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साल 2013 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के गवाह इकराम पर पुलिस के जानलेवा हमले के बाद रिहाई मंच सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने सफीपुर पट्टी की दंगा पीड़ित बस्ती बुढ़ाना में परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में इलाहाबाद हाईकोर्ट अधिवक्ता संतोष सिंह, रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव, बाकेलाल यादव और स्थानीय अफकार इंडिया फाउंडेशन के रिजवान सैफी, नदीम खान, अस्तित्व सामाजिक संस्था के कोपिन और कविता शामिल रहीं।

रिहाई मंच से इकराम की पत्नी ने कहा कि उस घटना के बाद से वह छह बेटियों और दो बेटों के साथ बहुत असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उन्हें डर है कि कब पुलिस आ जाए। उन्होंने बताया कि 17 जून को शाम लगभग 5 बजे तीन पुलिस वाले दोबारा आये। कहा कि वे पुलिस पर हुए हमले की जांच करने आए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पति पर गोलियां पुलिस ने चलायीं, उनके कपड़े फाड़े और अब कह रहे हैं कि पुलिस पर हमला…।

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इकराम की बेटी सलमा ने रिहाई मंच से बताया कि उसके पिता और दादा मुजफ्फरनगर हिंसा मामले में गवाह हैं और उन पर लगातार गवाही बदलने का दबाव बनाया जा रहा था। उस दिन (12 जून) सादे ड्रेस में एक आदमी आया और पापा को पूछते हुए घर में घुस गया। मोहल्ले में नूर हसन के यहां वलीमा था। बहुत से मिलने-जुलने वाले भी घर आए थे। पापा ऊपर वाले कमरे में थे।

जब ऊपर से वो पापा को खींचकर लाने लगा तो अफरा-तफरी का माहौल हो गया। हम सब बहनें रोने लगीं और अपने पापा को ले जाने का कारण पूछने लगीं तो पुलिस वाले हमें भी मारने-पीटने लगे। यह पूछने पर कि कोई महिला पुलिस थी तो सलमा ने ‘नहीं’ में जवाब दिया और साथ ही यह भी बताया कि पुलिस वाले महिलाओं तक को मार रहे थे। उन्होंने बताया कि उनकी अम्मी और उन लोगों ने जब विरोध किया तो पुलिस वालों ने उनके कपड़े तक फाड़ दिए।

60 वर्षीय बुजुर्ग महिला हसीना के पैर और उनकी बहन रुबीना के गर्दन में आज भी चोटों के जख्म देखे जा सकते हैं। इसके बाद पुलिस वाले उनके पिता को जबरन ले जाने लगे। जब उन्होंने विरोध किया तो गोलियां भी चलायीं जिसमें एक गोली तो ऐसे मारी जैसे उनको पकड़ना तो केवल बहाना था, वे तो पापा को मारने के लिए ही आए थे। सलमा ने रोते हुए बताया कि 25 जून को उसकी शादी है और पुलिस वालों ने तो हमारे घर में डर का माहौल पैदा कर दिया है।

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इकराम के पिता नफेदिन ने रिहाई मंच से बताया कि वो रहीसू की हत्या के गवाह हैं और 24 जून को अदालत में उनकी गवाही है। इसलिए उन पर पिछले पांच-सात महीने से बहुत दबाव बनाया जा रहा है। करन, मदन, प्रवीण, फेरु, विक्की आरोपियों का नाम लेते हुए कहते हैं कि ये सब बीजेपी  विधायक उमेश मलिक के आदमी हैं।

मोहल्ले वालों से जब रिहाई मंच ने बात कि तो पता चला कि सादी वर्दी वाला नितिन सिपाही था जिसके साथ तीन मोटर साइकिल पर लोग आए थे। थोड़ी ही देर में एक बोलेरो और दो जीप भी आ गयी। रहीसू हत्याकांड मामले में शमशेर भी उनके साथ एक गवाह हैं। उन पर भी लगातार दबाव है। वो बताते हैं कि आरोपी पक्ष ने साढ़े चार लाख रुपए देकर अन्य गवाहों को अपने पक्ष में कर लिया है जिनमें अफरोज, प्रवीन और यहां तक कि रहीसू का लड़का हनीफ भी शामिल है।

मुजफ्फरनगर हिंसा के दौरान रहीसू हत्याकांड मामले के अहम गवाह शमशेर उस दिन इकराम के साथ हुई घटना की बात करते हुए कहते हैं कि करन ने छह लाख रुपए तक गवाही बदलने पर देने को कहा। ये लोग लगातार सर्दियों से दबाव बना रहे हैं। इस घटना के पन्द्रह-बीस दिन पहले भी सुरेश और रहीसू का बेटा हनीफ आए थे। दो महीने से इनका दबाव बहुत बढ़ गया है। वे बताते हैं कि करन, सुरेश, भूरा, फेरु, विक्की, मदन, संहसर, प्रवीण, श्यामत ये सभी दो-दो, तीन-तीन साल तो कोई छह महीना जेल काटकर निकले हैं।

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इकराम और उनके भाई आदिल भी फेरी के काम से परिवार पालते रहे हैं। मुजफ्फरनगर हिंसा पीड़ितों के इस मोहल्ले में मुहम्मदपुर रायसिंह, खेड़ा, फुगाना और अन्य जगहों से सांप्रदायिक तत्वों के डर-भय से विस्थापित साठ-सत्तर परिवारों का बसेरा है।

प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि ग्राम मुहम्मदपुर रायसिंह थाना भौराकलां में 8 सितंबर 2013 को हुई सांप्रदायिक हिंसा में रहीसुद्दीन पुत्र कपूरा की हत्या हो गई थी जिसके गवाह इकराम के पिता नफेदीन हैं। इकराम सहित कई लागों के घरों में आगजनी हुई थी जिसको लेकर मुकदमा दर्ज हुआ था। इस घटना के बाबत स्पेशल टीम ने जांच की थी जिसके बाद फेरु, करन, संहसर, मदन, प्रवीण, विजय, संजीव, विनोद, प्रवीण आदि को आरोपी बनाया गया था।

इस मुकदमे में इकराम की गवाही होनी है जिसको लेकर सुरेश, विक्की और अन्य इकराम पर छह-सात महीने से अपने पक्ष में गवाही देने का दबाव बना रहे थे। सुरेश और अन्य 10 जून को लगभग 10 बजे सुबह इकराम के घर आए और समझौते के लिए दबाव बनाने लगे। सुरेश का कहना था कि विधायक उमेश मलिक के मन मुताबिक फैसला कर लो, तुमको छह लाख रुपए मिलेगा लेकिन गवाही दोगे तो तुम्हारा इनकाउंटर करा दिया जाएगा। इकराम लालच और धमकी के सामने नहीं झुके।

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(नोट: यह खबर मानवाधिकार संगठन रिहाई मंच की ओर से सीधा हमें मेल से प्राप्त हुई है. जिसे बिना संशोधित किये प्रकाशित किया गया है.)

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