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राजस्थान: अगर यह साजिश हुई कामयाब तो गिर जाएगी गहलोत सरकार

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जयपुर: ऐसा लग रहा है कि राजस्थान की राजनीति पटरी पर शीघ्र ही आ जाएगी। राज्यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) का यह बयान स्वागत योग्य है कि वे विधानसभा का सत्र बुलाने के विरुद्ध नहीं हैं लेकिन उन्होंने जो तीन शर्तें रखी हैं, वे तर्कसम्मत हैं और उन तीनों का संतोषजनक उत्तर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) दे ही रहे हैं।

यों भी अदालतों के पिछले फैसलों और संविधान की धारा 174 के मुताबिक विधानसभा सत्र को सामान्यतया राज्यपाल आहूत होने से रोक नहीं सकते। मंत्रिमंडल की सलाह मानना उनके लिए जरुरी है।

हालांकि गहलोत ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक गुहार लगा दी है और राजभवन के घेरे जाने की आशंका भी व्यक्त की है लेकिन वे यदि चाहते और उनमें दम होता तो वे खुद ही सारे विधायकों को विधानसभा भवन या किसी अन्य भवन में इकट्ठे करके अपना बहुमत सारे देश को दिखा देते। राजभवन और अदालतें दोनों अपना-सा मुंह लेकर टापते रह जाते।

यह भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत ही दुखद बात है कि कोरोना के संकट के दौरान राजस्थान-जैसे राज्य की सरकार अधर में लटकी रहे। महामहिम कलराज मिश्र यों तो अपनी विवेकशीलता और सज्जनता के लिए जाने जाते हैं लेकिन राज्यपाल का यह पूछना कि आप विधानसभा का सत्र क्यों बुलाना चाहते हैं? बहुत ही आश्चर्यजनक है।

विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए 21 दिन के नोटिस की बात भी समझ के बाहर है। 15 दिन पहले ही बर्बाद हो गए, अब 21 दिन तक जयपुर घोड़ों की मंडी बना रहे, यह क्या बात हुई?

महामहिम मिश्र को मप्र के स्वर्गीय राज्यपाल लालजी टंडन का उदाहरण अपने सामने रखना चाहिए। उन्होंने 21 दिन तो क्या, 21 घंटों की भी देर नहीं लगाई। क्या 21 दिन तक इसे इसीलिए लंबा खींचा जा रहा है कि सचिन पायलट के गिरोह की रक्षा की जा सके?

यदि सचिन-गुट कांग्रेस के पक्ष में वोट करेगा तो जीते-जी मरेगा और विरोध में वोट करेगा तो विधानसभा से बाहर हो जाएगा। जो भी होना है, वह विधानसभा के सदन में हो। राजभवन और अदालतों में नहीं।

गहलोत सरकार को गिरना है तो वह विधानसभा में गिर जाए। राज्यपाल खुद को कलंकित क्यों करें ? राज्यपाल का यह पूछना बिल्कुल जायज है कि विधानसभा भवन में विधायकों के बीच शारीरिक दूरी का क्या होगा? उसका हल निकालना कठिन नहीं है।

यदि अयोध्या में 5 अगस्त के जमावड़े को संभाला जा सकता है तो यह कोई बड़ी बात नहीं है। यदि इस मुद्दे को बहाना बनाया जाएगा तो लोग यह भी पूछेंगे कि आपने कमलनाथ- सरकार को गिराने के लिए ही तालाबंदी (लाॅकडाउन) की घोषणा में देरी की थी या नहीं?

भाजपा और केंद्र सरकार की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए भी यह जरुरी है कि राजस्थान विधानसभा का सत्र जल्द से जल्द बुलाया जाए।

डॉ. वेदप्रताप वैदिक —
राजनीतिक विश्लेषक
जीएनएस न्यूज़

(नोट: हमारे द्वारा केवल टाइटल संपादित किया गया है)

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