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मिश्रा को 10, तिवारी को 40, तो मॉब लिंचिंग के शिकार सुजीत गौतम को 5 लाख मुआवजा क्यों योगी जी – रिहाई मंच

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रिहाई मंच ने मॉब लिंचिंग के शिकार बाराबंकी के सुजीत गौतम की मौत के बाद योगी प्रशासन द्वारा 5 लाख के मुआवजे को रेवड़ी करार दिया. सवाल किया कि प्रतापगढ़ में आपसी रंजिश में मारे गए हिन्दू युवा वाहिनी जिलाअध्यक्ष ओम मिश्रा को 10 लाख, लखनऊ में पुलिस की गोली का शिकार हुए विवेक तिवारी के परिवार को 40 लाख रूपए और अधिकारी स्तर की नौकरी किस आधार पर दी गई.

मंच ने आरोप लगाया कि एक तरफ सुप्रीमकोर्ट और विधि आयोग मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने की बात कर रहे हैं. दूसरी तरफ राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास से मात्र 200-300 मीटर की दूरी पर जिला अस्पताल में दलित युवक इलाज के आभाव में तिल तिल कर मर जाता है योगी तो दूर शासन प्रशासन के किसी ज़िम्मेदार ने मिलने की ज़हमत नहीं की.

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सुजीत गौतम की मौत के बाद बाराबंकी पुलिस कह रही है कि यह मॉब लिंचिंग की घटना नहीं है तो क्या बाराबंकी पुलिस इतना कहने के लिए उसकी मौत का इंतज़ार कर रही थी.

पुलिस मॉब लिंचिंग की घटना से कर रही इंकार

बाराबंकी पुलिस ने थाना देवा में घटित घटना को मॉब लिंचिंग कहे जाने को भ्रामक बताया. इस पुलिसिया खंडन का खंडन करते हुए रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि खुद पुलिस कह रही है कि वहां के लोगों के द्वारा चोर समझ कर मारा पीटा गया तथा जलाने का प्रयास किया गया.

जिन अभियुक्तों द्वारा घटना कारित की गई वह सब एक ही परिवार के हैं तथा वहां उन्ही लोगों का घर है. उपरोक्त घटना मॉब लिंचिंग नहीं है तो उसे यह भी ज्ञान देना चाहिए था की मॉब लिंचिंग किसे कहते हैं. जबकि इस घटना में आरोपियों की वल्दियत भी अलग-अलग है जिसे पुलिस के कथन से भी जाना जा सकता है कि वहां उन्हीं लोगो का घर हैं.

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एक ही परिवार के लोगों द्वारा घटना के अंजाम देने के नाम पर मॉब लिंचिंग का केस न मान कर पुलिस दोषियों को बचाने की फ़िराक में हैं. उन्होंने कहा कि सामूहिक बलात्कार के मामले में जिस तरह गैंगरेप की धारा के तहत कार्रवाई होती है ठीक उसी तरह मॉब चाहे एक परिवार, एक समाज, एक गाँव का हो उसके द्वारा की गई हत्या मॉब लिंचिंग ही कही जाएगी.

रिहाई मंच नेता शकील कुरैशी ने कहा कि बाराबंकी के देवा में 17 जुलाई को मॉब लिंचिंग के शिकार हुए सुजीत की मौत के बाद 22 जुलाई को सृजनयोगी आदियोग के साथ रिहाई मंच के राजीव यादव, शाहरुख़ अहमद और रॉबिन वर्मा उनके गाँव पहुंचे. दलित युवक को पानी के ड्रम में डुबोकर, करंट लगाकर प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालकर ज़िन्दा जलाने जैसी जघन्य घटना के बाद ग्रामवासियों के दबाव में शासन-प्रशासन ने सुजीत गौतम के परिवार को 5 लाख रूपये व 4 बीघा जमीन के मुआवजे का आश्वासन दिया.

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बाद में मुआवजे को किसान दुर्घटना योजना के तहत दिए जाने की बात कही. यह पूरा घटनाक्रम मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओ पर शासन प्रशासन की असंवेदनशीलता को उजागर करता है. योगी सरकार जहाँ दलितो के लिंचिंग में मारे जाने पर नाम मात्र का मुआवजा देकर उन्हें झांसा देती है वहीं मुसलमानों के मारे के जाने पर मुआवजा भी नहीं देती.

सवर्ण समाज के लोगों की मौत के बाद योगी सरकार की मुआवजा नीति साफ़ करती हैं कि हत्या जैसे सामाजिक अपराध को भी वह मनुवादी चश्मे से देखती है. उन्होंने सबका साथ सबका विकास वाली सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हत्या हत्या होती है और सरकार सबकी होती है.

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इस मामले में अभी तक सभी दोषियों की गिरफ्तारी न होना प्रशासन पर सवाल खड़ा करता है. उसे तनिक भी चिंता नहीं कि पीड़ित परिवार अभी भी घटना से भयभीत है और अपनी सुरक्षा को लेकर सशंकित है.

(नोट: यह खबर मानवाधिकार संघठन रिहाई मंच की ओर से प्रेस विज्ञप्ति द्वारा प्राप्त है जिसे बिना संसोधन किये प्रकाशित किया गया है.)

 

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