बीजेपी शासन में सामाजिक संगठन के लोग घरों में प्रेस कांफ्रेंस करने पर हुए मजबूर

कश्मीर, रिहाई मंच, प्रोफेसर राम पुनियानी, पत्रकार संदीप पाण्डेय, एडवोकेट मोहम्मद शुएब, सामाजिक कार्यकर्ता राजीव यादव, हफीज किदवई, योगी आदित्यनाथ, योगी सरकार, लखनऊ, rihai manch press conference in home, advocate mohammad shueb,

कश्मीर मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्यों की बीजेपी सरकारों ने पूरे देश में अघोषित इमरजेंसी की स्थिति बना दी है। इसका असर सबसे ज़्यादा सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों पर पड़ा है। दिल्ली से लेकर प्रदेशों तक सामाजिक कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण तरीके से भी प्रदर्शन करने की इजाज़त नहीं है। एक के बाद एक सभी को नज़रबंद किया जा रहा है। घर से बाहर पब्लिक मीटिंग कर नहीं सकते इसलिए ऐसे कुछ सामाजिक कार्यकर्ता अब घरों में ही प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया को अघोषित इमरजेंसी के बारे में बता रहे हैं।

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 11 और 16 अगस्त को कुछ सामाजिक संगठन ने कश्मीरी लोगों के समर्थन में एक घंटे का मौन मोमबत्ती प्रदर्शन करना चाहा। बीजेपी सरकार को इसमें खतरा दिखा और सभी को हाउस अरेस्ट कर दिया गया।

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रविवार को अयोध्या में दो दिवसीय साम्प्रदायिक सद्भावना शिविर का आयोजन रखा गया। लेकिन योगी सरकार को इसमें भी खतरा दिखा और सभी को रास्ते में ही रोक दिया गया।

यही नहीं आयोजक महंत युगल किशोर शास्त्री को गिरफ्तार भी कर लिया और देश भर से आए शिविरार्थियों को पुलिस प्रशासन ने धमकी देकर वापस भेज दिया।

इस आयोजन में मुम्बई से प्रोफेसर राम पुनियानी, पत्रकार संदीप पाण्डेय, एडवोकेट मोहम्मद शुएब, सामाजिक कार्यकर्ता राजीव यादव, हफीज किदवई सहित कई लोग शामिल होने जा रहे थे।

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सामाजिक संगठनों ने मोदी सरकार में केवल कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे देश में नागरिक अधिकारों के हरण का खतरा बताया

प्रोफेसर प्रताप भानु मेहता का कहना है केन्द्र सरकार ने हाल में जम्मू कश्मीर को पूरी तरह भारत में मिलाने का जो फैसला लिया है यह कश्मीर का भारतीयकरण करने के बजाए भारत का कश्मीरीकरण कर देगा, यह बात सहीं जान पड़ती है। कश्मीर में लोगों के नागरिक अधिकारों का हरण कर लिया गया है व अभिव्यक्ति की आजादी पर पूरी तरह रोक लगी हुई है।

श्रीनगर में मीडिया पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है और समाचारपत्र तक प्रकाशित नहीं हो पा रहे हैं जिससे बाहर के लोग कश्मीर की हकीकत न जान पाएं। ऐसा प्रतीत होता है कि जम्मू-कश्मीर के बाहर भी भारत के अन्य हिस्सों में कश्मीर के सवाल पर यदि कोई सरकार से अलग राय रखता है तो उसे नहीं बोलने दिया जाएगा और कोई कार्यक्रम नहीं करने दिया जाएगा।

कश्मीर के सवाल पर ही नहीं बल्कि अयोध्या में दो दिन की साम्प्रदायिक सद्भावना बैठक पर रोक लगाने से ऐसा लगता है कि अन्य विषयों पर भी जिसमें भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राय से अलग राय रखने वालों पर रोक लगा दी गई है। यह तो आपातकाल जैसी परिस्थिति जान पड़ती है। देश के लिए यह संकेत ठीक नहीं है और यदि जनता इसका विरोध नहीं करेगी तो कल उनके अधिकारों के भी हरण का खतरा है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा, भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने से अलग राय रखने वालों को नजरअंदाज कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक के एजेण्डे को पूरे देश पर थोपना पूर्णतया गैर-लोकतांत्रिक तरीका है। इसका विरोध करने वालों की आवाजों को दबाना सरकार की तानाशाही है। हम इस देश में लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए संकल्पबद्ध हैं और भाजपा सरकार के गैर-लोकतांत्रिक तरीकों के खिलाफ संघर्ष करते रहेंगे।

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Dipak Pandey is freelancer journalist from Lucknow district of Uttar Pradesh state in India. He is native of Allahabad district. He has worked with many reputed news channels and digital media platform. Contact him with email : dp362031@gmail.com, or mobile : 9125516663.

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