Home Apradh Samachar राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़े जाने का राजधानी में हुआ विरोध

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़े जाने का राजधानी में हुआ विरोध

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में महात्मा गांधी की प्रतिमा (Statue of Mahatma Gandhi) तोड़े जाने से नाराज़ सामाजिक संगठन के लोगों ने आरोपियों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग की. “गांधी-अम्बेडकर का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”, “राष्ट्रपिता की प्रतिमा तोड़ने वाले देशद्रोहियों को जेल भेजो”, “बाबा-ए-कौम गांधी का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”, “बाबा-ए-कौम का अहसान नहीं भूलेगा हिंदुस्तान” के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया गया.

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वक्ताओं ने द गांधीगिरी (The Gandhigiri) से कहा कि राष्ट्रपिता (Father of Nation) महात्मा गांधी की प्रतिमा को तोड़ने वाले लोग हारी हुई मानसिकता से ग्रषित हैं. ऐसा कृत्य करने वाले वाद संवाद में विश्वास नहीं रखते उन्हें सिर्फ हिंसा के माध्यम से अपने विचारों को थोपना आता है. गोडसे के वारिसों को यह जान लेना चाहिए कि गोडसे ने राष्ट्रपिता की हत्या वर्षों पहले की लेकिन उनके विचार आज ही नहीं सदियों तक जिंदा रहेंगे.

अगर पहले हो जाती कार्यवाही तो ऐसा न होता

एक पूर्व की घटना को याद दिलाते हुए वक्ताओं ने द गांधीगिरी (The Gandhigiri) से कहा कि मोदी-योगी सरकार के संरक्षण में आए दिन अम्बेडकर और गांधी की मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है. अगर सरकार अलीगढ़ में राष्ट्रपिता के पुतले पर गोली चलाने वालों के खिलाफ़ कार्रवाई करती तो आज गोडसे के वारिसों की हिम्मत नहीं होती कि वह राष्ट्रपिता की मूर्ती तोड़ें.

धरने में मुख्य रूप से सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के नेता पन्नालाल सुराना, मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित डा. संदीप पाण्डेय, रिहाई मंच अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब, राजीव यादव, सृजनयोगी अदियोग, शकील कुरैशी, रॉबिन वर्मा, प्रदीप पाण्डेय, अवध विकास मंच अध्यक्ष शम्स तबरेज़, मुर्तज़ा अली, मोहम्मद अफाक, फ़हीम सिद्दीकी, शरद पटेल, अभिभावक मंच से रवीन्द्र, अभ्युदय, प्रवीण श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे.

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