मुसलमानों के हाथों में बंदूक नहीं कलम होनी चाहिए – सहाबा एक्शन कमेटी

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स्वतंत्रता दिवस की शाम उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चौक इलाके में सहाबा एक्शन कमेटी (Sahaba Action Committee) की ओर से जलसा-ए-आम का आयोजन किया गया। कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल वहीद फारूकी (Abdul Wahid Farooqui) ने कहा कि देश के मुसलमानों के हाथों में बंदूक नहीं बल्कि कलम होनी चाहिए। मुसलमान अपने हालात को शिक्षा के जरिये सुधार सकते हैं न कि बंदूक से। फारूकी ने बिना नाम लिए शिया धर्म गुरू कल्बे जवाद के एक ऐलान के जवाब में यह बात कही। जिसमें उन्होंने बीते माह लखनऊ में माॅब लिंचिंग से आत्मसुरक्षा के लिए लाइसेंसी बन्दूक का फार्म भरवाने का आयोजन रखा था।

दहशतगर्दी का इलाज सहाबा की गुलामी

सहाबा एक्शन कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल वहीद फारूकी (Abdul Wahid Farooqui) ने बताया कि जलसा-ए-आम का मकसद देश मंे शांति और सदभाव बनाये रखना है। इसके बाद ‘दहशतगर्दी का इलाज सहाबा की गुलामी’ के बारे में उन्होंने बताया कि दहशतगर्दी से जिस तरह मुसलमानों को जोड़ा जाता है यह गलत है। मुसलमान कभी दहशतगर्द नहीं हो सकता।

65 कैदियों को जुर्माना अदा कर रिहा कराया

अब्दुल वहीद फरूकी ने बताया कि हाल ही में सहाबा एक्शन कमेटी (Sahaba Action Committee) की ओर से जेल में बंद उन 65 कैदियों को छुड़वाने का काम किया गया जिन्होंने सज़ा तो पूरी कर ली थी लेकिन उनके पास जुर्माने की रकम अदा करने के लिए पैसे नहीं थे। उन 65 कैदियों में 15 मुसलमान और 50 हिन्दू समुदाय से शामिल है।

बंदूक से नहीं कलम से मुसलमान अपनी हालत सुधार सकता है

पिछले माह शिया धर्म गुरू कल्बे जवाद (Kalbe Jawad) ने माॅब लिंचिंग से आत्मरक्षा के लिए मुसलमानों और दलितों को हथियारों की ट्रेनिंग से लेकर बंदूक के लाइसेंस भरवाने तक का आयोजन लखनऊ में रखा था। इस पर अब्दुल फारूकी (Abdul Wahid Farooqui) ने कहा कि बंदूक उठा कर मुसलमान विलेन बनेगा। देश के मुसलमानों को अगर खुदकी और देश की तरक्की चाहिए तो कलम उठाना पड़ेगा।मुसलमान आईएएस, पीसीएस, डॉक्टर, इंजिनियर बने और देश की सेवा करें। शिक्षा से ही हालत सुधारी जा सकती है न कि बंदूक से।

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