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सुरक्षा एजेंसियों के लिए काम करके पछताया साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, मिल रही जेल भेजने की धमकी

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के एक 26 वर्षीय साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट रोहित (बदला हुआ नाम) ने चार साल से अधिक समय तक छत्तीसगढ़ में कई भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए काम किया। बदले में जब प्रमाणपत्र और सम्मान देने की बारी आई तो सभी सुरक्षा एजेंसियों ने मुंह मोड़ लिया। यही नहीं, जब उसने काम छोड़ना चाहा तो उसे फर्जी केस में जेल भेजने की धमकी देने लगे। रोहित को मजबूर होकर अब कोर्ट के ज़रिये अपना हक़ मांगना पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व लोकसभा सांसद अभिषेक सिंह के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में आये रोहित का कहना है कि उसने राज्य पुलिस, आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), खुफिया ब्यूरो और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के लिए काम किया है।

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट का दावा है कि उसने कश्मीर में अलगाववाद, पत्थरबाज से लेकर नक्सलवाद और आतंकवादी सगठन आईएसआईएस, खालिस्तान की साजिशों का पता लगा कर एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण इनपुट दिए हैं। उसकी दी जानकारी से कई बड़ी घटनाएं होने से पहले टल गई जिसके लिए सुरक्षाबलों को पुरस्कार भी मिला, लेकिन रोहित का कहीं नाम तक नहीं लिया गया।

रोहित ने द गांधीगिरी को बताया कि उसने जिन शीर्ष अधिकारीयों के लिए काम किया सभी ने उसकी तारीफ करते हुए उसके कार्य का उपयोग लारेल और ACR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) अर्जित करने के लिए किया था। लेकिन जब उसने प्रमाण पत्र और सम्मान देकर अकादमिक रूप से मदद के वादे को पूरा करने के लिए कहा तो वह मुंह कर गए।

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साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट रोहित समझ गया कि एजेंसियां अपना वादा पूरा नहीं करना चाहती हैं, तब उसने उनके लिए काम न करने की इक्षा ज़ाहिर की। जिस पर एजेंसियों की ओर से उसे जेल में डालने की धमकी मिलनी शुरू हो गई। धमकियों से घबरा कर उसने पीएमओ (प्रधानमंत्री) को पत्र लिखा और संज्ञान में लेते हुए छत्तीसगढ़ सरकार से उसके मामले को देखने के लिए कहा, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।

इसके बाद रोहित ने बिलासपुर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए कहा कि, “रोहित और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच कोई समझौता नहीं था और यह स्वैच्छिक कार्य था, इसलिए यह राज्य सरकार को कोई कार्रवाई करने का निर्देश नहीं दे सकता।”

दरअसल, रोहित अपनी पढ़ाई के साथ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए अनुभव प्रमाणपत्र और सम्मान पत्र देने के वादे से बिना वेतन के काम कर रहा था ताकि उसे साइबर सुरक्षा में उन्नत अध्ययन करने का मौका मिले। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के झूठे वादे से उसे काफी ठेस पहुंची है जिस पर उसे अब पछतावा हो रहा है।

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