रविवार, फ़रवरी 5, 2023
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Azam Khan Health News: सेहत और कोरोना रिपोर्ट की ताजा जानकारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan) की मंगलवार को सेहत (Health) स्थिर बताई जा रही है। कोरोना जांच भी निगेटिव आने के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर डॉक्टरों ने इलाज शुरू दिया है।



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बता दें कि, सोमवार को सीतापुर जेल में सांस की तकलीफ बढ़ने पर प्रशासन ने लखनऊ स्थित मेदान्ता हॉस्पिटल में उन्हें भर्ती कराया था।

शुरूआती कोरोना जांच के चलते आजम खान (Azam Khan) को पहले इमरजेंसी में भर्ती किया गया था।

मेदांता अस्पताल के मेडिकिल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर बताते हैं कि आजम खान के स्वास्थ्य में पहले से सुधार हुआ है।

पोस्ट कोविड समस्याओं के चलते उन्हें कमजोरी और सांस समेट कई दिक्कतें हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।

आजम खान (Azam Khan) पर क्या है कानूनी मामला

गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश की सियासत पलटते ही आजम खान के बुरे दिन शुरू हो गए। खान के खिलाफ भूमि अतिक्रमण और आपराधिक धमकी से संबंधित 80 कानूनी मामले दर्ज हैं।

रामपुर के एसपी अजय पाल सिंह ने जमीन हड़पने के एक मामले की जांच करते हुए पुष्टि की कि घरेलू सामान, आभूषण और घरेलू मवेशियों की लूट के बारे में शिकायतकर्ताओं के दावे सही थे।

इसके अलावा खान द्वारा स्थापित गैर सरकारी संगठन जौहर ट्रस्ट के खिलाफ जमीन हड़पने के भी कई मामले दर्ज हैं।

जनवरी 2020 में, रामपुर स्थानीय प्रशासन ने 6 किसानों को लगभग 17 बीघा जमीन सौंपी जाने के साथ ही सही मालिकों को कब्जे वाली भूमि की वापसी शुरू की।

जनवरी 2019 में, उत्तर प्रदेश के एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में खान, उनकी पत्नी तज़ीन फातमा और उनके बेटे अब्दुल्ला के जन्म प्रमाण पत्र के संबंध में जालसाजी का मामला दर्ज किया गया था।

हालांकि मार्च 2019 में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस द्वारा जांच पूरी होने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

जनवरी 2020 में, अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान अब्दुल्ला और उसके माता-पिता को अदालत में पेश होने में विफल रहने के लिए फरार घोषित कर दिया इसके बाद, प्रवर्तन निदेशालय ने आज़म की संपत्तियों पर कार्यवाही की।

26 फरवरी 2020 को, उन्हें अपनी पत्नी और बेटे के साथ अपने बेटे का फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के लिए जेल भेज दिया गया।

उन्हें पार्टी के नेता अखिलेश यादव का समर्थन मिला, जिन्होंने दावा किया कि मामले राजनीति से प्रेरित थे।

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