तो क्या चीन में डेवेलप्ड मोबाइल गेम, ऐप और इलेक्ट्रॉनिक सामान के इस्तेमाल से भारत में भी फैल सकता है कोरोना वायरस ?

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सोशल मीडिया के माध्यम से एक जानकारी मिली है जिसमें चीनी मोबाइल गेम और ऐप के इस्तेमाल से कोरोना वायरस फैलने का दावा किया जा रहा है। चीन में डेवलप्ड किये गए मोबाइल गेम और ऐप को गूगल प्ले स्टोर से न डाउनलोड करने को कहा जा रहा है। साथ ही चीनी कंपनी के मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। कहा जा रहा है कि चीन में फैली महामारी (कोरोना वायरस) को खुद चीनी वैज्ञानिकों ने दुश्मन देशों पर जैविक हमले के इरादे से बनाया है। लेकिन, किसी तरह की चूक से यह घातक वायरस लेबोरेट्री से लीक हो गया और हवा में फैल गया।

इन दावों की सच्चाई जानने के लिए द गांधीगिरी ने संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह से बात कि। डॉक्टर ने बताया कि इसमें आधी बात सच है और आधी झूठ। यह सच है कि यदि भारत में चीन से आयात किसी भी वास्तु में संक्रमण साथ लग कर आता है तो उसे छूने मात्र से संक्रमित बीमारी हो सकती है। एक खबर के मुताबिक कोरोना वायरस से ग्रस्त एक रोगी के बगल में बिना मास्क पहने खड़े होने पर मात्र 15 सेकंड में एक व्यक्ति संक्रमण का शिकार हो गया। ऐसे में इतनी तीर्व गति से प्रभावित करने वाले इस भयानक वायरस से बच पाना नामुमकिन है।

इसके बाद द गांधीगिरी ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य शर्मा से आगे की जानकारी ली। सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि बायोलॉजिकली यह मुमकिन है कि इस तरह का संक्रमण छूने से फैल सकता है, लेकिन मोबाइल गेम और ऐप से कोरोना वायरस फैलने की बात पूरी तरह से झूठ है।

शर्मा ने बताया कि एप्लिकेशन (ऐप) वायरस एक वर्चुअल वायरस होता है जिसे प्रोग्रामिंग कर बनाया जाता है। ऐप वायरस एक काल्पनिक है जिसे न तो हम छू सकते हैं और न ही देख सकते हैं जबकि कोरोना वास्तव में फिजिकल वायरस है। ऐप वायरस को प्रोग्रामिंग (एंटी वायरस) के ज़रिये पकड़ा और खत्म किया जा सकता है। इस तरह के वायरस साइबर क्राइम को अंजाम या सिस्टम बिगाड़ने के लिए बनाये जाते हैं। यह स्वतः ही उत्पन्न नहीं होते हैं। इसलिए, ऐप वायरस से कोरोना वायरस फैलने की बात पूरी तरह से झूठ है।

बता दें कि, दावे में एक और बात कही जा रही है जिसमें चीन पर संदेह जताया जा रहा है कि उसने खुद ही इस घातक वायरस को इजाद किया है और गलती से यह वायरस हवा में फ़ैल गया। दरअसल, अमेरिकी सांसद टॉम कॉटन ने आरोप लगाते हुए मीडिया में बयान दिया था कि, चीन के वुहान शहर (जहां सबसे ज्यादा कोरोना वायरस का कहर है) के नेशनल बायोसेफ्टी प्रयोगशाला में कोरोना वायरस बनाया गया, जहां से यह लीक होकर आबादी वाली जगहों पर फैला था। हालांकि, अमेरिकी मीडिया ने बिना सबूत टॉम कॉटन के किये दावों को पूरी तरह से नकार दिया है, लेकिन कॉटन अब भी अपनी बात पर अड़े हुए हैं।

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Dipak Pandey is freelancer journalist from Lucknow district of Uttar Pradesh state in India. He is native of Allahabad district. He has worked with many reputed news channels and digital media platform. Contact him with email : dp362031@gmail.com, or mobile : 9125516663.