होम World | दुनिया म्यांमार: रोहिंग्या नरसंहार पर जो सेना की तारीफ करते थे, आज वही...

म्यांमार: रोहिंग्या नरसंहार पर जो सेना की तारीफ करते थे, आज वही सेना को “आतंकवादी” कह रहे हैं

myanman-buddhist-people-are-killing-by-military-after-rohingya-muslims-massacre
The-Gandhigiri-tg-website-designer-Developer-lucknow

कहते हैं किस्मत की मार सबसे दर्दनाक होती है। आज ऐसी ही किस्मत की मार म्यांमार (Myanmar) की जनता झेल रही है। वो बुद्धिस्ट कट्टरपंथी जो अगस्त 2017 में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार से खुश थे और वो भी जिन्होंने इस वीभत्स घटना पर चुप्पी साधे रखी, आज दोनों ही अपने देश की सेना के आतंकवाद से परेशान है।

सोशल मीडिया नेटवर्क ट्वीटर पर #Terrorist (आतंकवादी) नाम से हैशटैग ट्रेंडिंग कर रहा है। म्यांमार की जनता ट्वीटर पर अपनी सेना को “सेना आतंकवाद” से संबोधित करते हुए अपने देश की स्थिति बयान कर रही है।

यह भी पढ़ें: “कोरोना जिहाद” प्रोपेगेंडा पर मुस्लिमों को बदनाम करने वाले गोदी मीडिया एंकर रोहित सरदाना की COVID -19 से दर्दनाक मौत

बुधवार को सोशल एक्टिविस्ट मौंग ज़ारनी एक बुद्धिस्ट टेम्पल पर सेना के हमले की तस्वीर शेयर करते हुए लिखते हैं, “SAC #terrorist शासन ने #myanmar के अल्पसंख्यक क्षेत्र में एक बौद्ध मठ में तोड़फोड़ की। सैनिकों ने भी बर्बरता की, लूटपाट की और चोरी की। मुट्ठी भर गंदे और प्रसिद्ध भिक्षुओं को सेना के संरक्षक के रूप में चुना जाता है।”

 

साल 2017 में जिस तरह म्यांमार (Myanmar) में हुए रोहिंग्या नरसंहार के बाद रोहिंग्या मुसलमान अपना देश छोड़ दूसरे देशों की ओर पलायन करने पर मजबूर हुए थे, आज ठीक उसी तरह म्यांमार की जनता भी जान बचाने के उद्देश्य से दूसरे देशों में शरण ले रही है।

म्यांमार मीडिया “म्यांमार नाउ” की खबर के मुताबिक करेन राज्य में जून्टा हवाई हमले के बाद सैकड़ों लोग थाईलैंड में शरण लेते हैं। यदि म्यांमार की सेना के हवाई हमले जारी रहते हैं, तो सैल्विन नदी के किनारे बसे हजारों विस्थापित लोगों के पलायन की आशंका है।

 


गौरतलब है कि अगस्त 2017 म्यांमार (Myanmar) के राखीन प्रांत (Rakhine) में बौद्ध कट्टरपंथियों और सेना ने मिलकर हजारों रोहिंग्या मुसलमानों का नरसंहार किया था। म्यांमार की सेना ने खुद इसकी पुष्टि की थी।

अन्य बड़ी खबरों के लिए यहाँ क्लिक करें

the-gandhigiri-telegram-channel