चीन ने 10 लाख उइग़ुर मुसलमानों को किया कैद, मिटाये कई मस्जिदों के नामोनिशान

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उत्तर-पश्चिम शिंजियांग प्रांत की कम्युनिस्ट चीनी सरकार ने 10 लाख से भी ज्यादा चीनी मुसलमानों को कैद कर रखा है. इसके अलावा कई मस्जिदों को भी ध्वस्त कर दिया गया है. जिसकी पुष्टि सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों से हुई है. चीन में रहने वाले उइग़ुर मुस्लिम समुदाय आज बहुत ही खतरनाक दौर से गुजर रहे हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ ही देशों की मीडिया इस घटना की जानकारी दे रही है. भारतीय मीडिया ने भी इस खबर कोई प्रमुखता नहीं दी है.

बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक शिंजियांग में रहने वाले अल्पसंख्यक उइग़ुर, कज़ाख और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को इन दिनों काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. करीब 0.4 से 1.8 प्रतिशत आबादी वाले चीन देश के शिंजियांग में सबसे अधिक अल्पसंख्यक मुसलमानों की आबादी है. जिनकी विचारधारा को जबरन बदला जा रहा है. उन्हें डाढी रखने, मज़हबी टोपी पहनने से लेकर अपनी भावनाओं को खुले में व्यक्त करने की मनाही है. उत्तर-पश्चिम चीन की कम्युनिष्ट सरकार ने 10 लाख से भी ज्यादा मुसलमानों को कैद कर रखा है. ऐसे सैंकड़ों चीनी मुस्लिम या तो मारे गये या अपनी जान बचा कर दूसरे देश भाग निकले जिन्होंने इसका विरोध किया.

नकशे से गायब हो गईं दर्जनों मस्जिदें

मुस्लिम समुदाय के इबादतगाह मस्जिद को भी शिंजियांग चीनी सरकार नहीं बख्श रही है. सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों से पता चलता है कि शिंजियांग प्रांत में करीब दर्जन भर मस्जिदों को ध्वस्त कर दिया गया है. इसके अलावा कई उइग़ुर मुस्लिम बाहुल्य बस्तियों को भी उजाड़ कर वहां कामर्शियल डेवेलाॅपमेंट का काम शुरू कर दिया गया है.

अल्पसंख्यकों को क्यों कैद कर रहा है चीन?

शिंजियांग सरकार इस कैद को ट्रेनिंग सेंटर कहती हैं. अधिकारियों का कहना है कि चीनी मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों की चरमपंथी सोच को बदलने के लिए ऐसा किया जा रहा है. उनकी नज़र में सभी अल्पसंख्यक संभावित अपराधी हैं.

कैंप में ट्रेनिंग के जरिये धर्म या संस्कृति की जगह चीन शासित कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी सिखाई जा रही है. शिंजियांग सरकार का कहना है कि ऐसा करके वो किसी तरह के अपराध को होने से पहले ही उसे रोक रही है. इस तरह के कैदखाने हर जगह बनाये जा रहे हैं जिसे वो ट्रेनिंग सेंटर कहते हैं.

ट्रेंनिग सेंटर या कैदखाने में आखिर क्या चल रहा है?

चीनी शिंजियांग सरकार भले ही इसे ट्रेनिंग सेंटर कहे लेकिन उन कैदखानों से भागने में सलफ हुए कुछ लोगों का कहना है कि वहां उन्हें तरह तरह की यातनाएं दी जाती हैं. उनका ब्रेनवाॅश से लेकर उन्हें हर हाल में चुप रहने की धमकी दी जाती है. उनकी धार्मिक भावनाओं, मांन्यताओं और विचारधारा को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है. जो लोग ऐसा करने के लिए राज़ी नहीं होते, उन्हें या तो भारी यातनाओं से गुज़रना पड़ता है या जान से मार दिया जाता है.

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ऐसे कैदखानों में कैदी अल्पसंख्यकों को खुशी ज़ाहिर करने की तभी इजाज़त मिलती है जब वहां कोई अधिकारी या पत्रकार विजिट करने आ रहा हो. इसके अलावा एक छोटे से कमरे में 10 से 12 लोगों को रखा जाता है. जहां केवल एक ही टायलेट इस्तेमाल करने के लिए मिलता है.

बची हुई मस्जिद के इमाम का क्या कहना है

शिंजियांग प्रांत में अब कुछ ही मस्जिदें सही सलामत हैं. उन मस्जिदों के इमाम और अन्य मुसलमानों के चेहरे पर डर साफ देखा जा सकता है. सरकारी मान्यता प्राप्त इमाम माइमाइती जुमा का कहना है कि वहां दाढी रखने और मज़हबी भावनाओं को व्यक्त करने की पूरी छूट है.

उनके मुताबिक सरकार नौजवानों को नौकरियां दे रही है इसलिये उनके पास नमाज़ पढ़ने का वक्त नहीं है. लेकिन कैदखानों में बंद 10 लाख से ज्यादा मुसलमान और कई स्थानीय मुसलमानों के घरों के बाहर चस्पा सरकारी आदेश कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.

शिंजियांग प्रांत विवाद और उइग़ुर मुसलमान

शिंजियांग गणराज्य चीन का स्वायत्तशासी प्रांत है. यहां अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की संख्या सबसे अधिक है. यह एक रेगिस्तानी और सूखा इलाका है. इसकी सरहदें दक्षिण में तिब्बत और भारत, दक्षिण-पूर्व में चिंग हई और गांसू, पूर्व में मंगोलिया, उत्तर में रूस और पश्चिम में काज़कस्तान, किरगिज़स्तान, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से मिलती हैं. यहां तुर्की नस्ल के लोग उइग़ुर कहलाते हैं जो करीब सभी मुसलमान हैं. यह इलाका चीनी तुर्किस्तान या मशरिकी तुर्किस्तान भी कहलाता है. यहां चीन से अलग होने के लिए सदियों से अलगाववादी संघर्ष चल रहा है.

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उइग़ुर लोगों का एक अलगाववादी समुह सदियों से शिंजियांग प्रांत को चीन से अलग करने के लिए संघर्ष कर रहा है. समुह का मानना है कि यह प्रांत चीन का अंश नहीं है. बल्कि 1949 में चीन ने आक्रमण कर इस हिस्से पर कब्जाया था और अभी तक अनाधिकृत रूप से चीन का कब्जा है. पूर्वी तुर्किस्तान स्वाधीनता आंदोलन नाम का दल कुछ तुर्की मुसलमानों द्वारा चलाया जा रहा है. अक्सर अलगाववादी समुह और शिंजियांग की कम्युनिष्ट पार्टी सरकार के बीच हिंसक झड़प भी होती रहती है.

हालही में साल 2013-14 में शिंजियांग के काशगार, कुनमिंग जैसे शहरों में अलगाववादी और पुलिस के बीच खूनी झड़प से लेकर दंगे तक हुए. जिनमें कई दर्जन मौतें हुई थीं. इनमें करीब 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की भी खबर है. चीनी सरकार ने इन हिंसक झड़प और दंगों के पीछे अलगावावादी समुह को जिम्मेदार ठहराया था.

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Dipak Pandey is freelancer journalist from Lucknow district of Uttar Pradesh state in India. He is native of Allahabad district. He has worked with many reputed news channels and digital media platform. Contact him with email : dp362031@gmail.com, or mobile : 9125516663.

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